केंद्र से टकराव की राजनीति पर आगे बढ़तीं ममता

"ये आदमी (मोदी) भ्रष्टाचार का मास्टर है. पहले चाय वाला था और अब रफाल वाला बन गया है"-ममता बनर्जी

"बर्बर और अराजक है बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार"-योगी आदित्यनाथ

"योगी पहले अपना उत्तर प्रदेश संभालें जहां दिनदहाड़े पुलिस वालों की हत्या हो रही है" -ममता

एक-दूसरे पर हमला करने वाले ये तमाम बयान बीते एक हफ़्ते के दौरान के हैं.

इनसे पता चलता है कि दीदी के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री अब केंद्र और बीजेपी से टकराव की राजनीति पर आगे बढ़ रही हैं.

वैसे, ममता, उनकी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के आपसी रिश्ते बीते चार-पांच साल से मधुर नहीं रहे हैं. लेकिन खासकर बीते छह महीनों से इसमें तेजी से तल्खी आई है.

इसकी शुरुआत बीते साल के आखिर में बीजेपी की प्रस्तावित रथयात्राओं को अनुमति नहीं देने से हुई थी.

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के दरवाजे खटखटाने के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने पार्टी को यहां रथयात्रा की अनुमति नहीं दी.

ममता नोटबंदी और जीएसटी के खिलाफ भी सबसे ज्यादा मुखर रही हैं.

लेकिन रथयात्रा और लगभग उसी समय से विपक्षी दलों का महागठंबधन बनाने की कोशिशों ने ममता और बीजेपी के बीच की खाई और बढ़ा दी है.

हाल के दिनों में तो दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर जैसे हमले कर रहे हैं, उसकी पहले कोई मिसाल नहीं मिलती.

एक तरफ दीदी ने मोर्चा संभाल रखा है तो दूसरी ओर से नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज लगातार जुबानी बम बरसा रहे हैं.

चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई की कोशिशों के विरोध में धरने पर बैठ कर ममता ने अपनी साफ कर दिया है वे टकराव की इस राजनीति से पीछे नहीं हटेंगी.

दिलचस्प बात यह है कि ममता केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना के तहत काम करने का आरोप लगा रही हैं तो बीजेपी नेता भी उनकी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ यही आरोप लगा रहे हैं.

अब ताजा मामले में नदिया जिले के तृणमूल कांग्रेस विधायक सत्यजीत विश्वास की हत्या के मामले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल राय के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है.

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