तीन तलाक़ क़ानून पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट
ती न तलाक़ को दंडात्मक अपराध बनाने वाले क़ानून को चुनौती देने वाली तीन याचिका ओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर सहमति दे दी है. साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है. याचिका में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है जिसे पिछले महीने ही संसद में पास किया गया था. सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाहि यों पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती ने बताया कि जस्टि स एनवी रमन्ना ने भारत सरकार को नोटिस भेजा है. याचिकाकर्ताओं में से एक जमीयत उलेमा-ए-हिं द ने कहा है कि इस क़ानून के तहत तीन तलाक़ को ग़ैर ज़मानती अपराध बनाया गया ताकि मुस्लिम पुरुषों को तीन साल के लिए जेल में बंद किया जा सके जबकि इसी भारत में पत्नी को छोड़ देना अपराध नहीं माना जाता है. संगठन का कहना था कि इस क़ानून के तहत तीन साल की सज़ा का प्रावधान 'असंगत और ज़्यादती' है. पिछले महीने राज्यसभा में विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद तीन तलाक़ पर विधेयक पास हो ग या था. मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में तीन तलाक़ को ग़ै...